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Friday, 28 November 2014

28-11-2014

मनरेगा के कनवरजेन्श से अब बनेगें इन्दिरा आवास
जबलपुर 28 नवम्बर 2014। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कनवरजेन्श से अब इन्दिरा आवास भी बनाये जाएगे। इन्दिरा आवास के लिए जो राशि स्वीकृत की जाएगी उस राशि के अतिरिक्त आवास बनाने में मजदूरी पर जो भी राशि व्यय होगी उस राशि का भुगतान मनरेगा से किया जाएगा। 
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नेहा मारव्या ने बताया कि केन्द्र शासन एंव मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद भोपाल से इस संबंध में निर्देश प्राप्त हुए है। इन्दिरा आवास योजना एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना दोनों योजनाएं केन्द्र शासन द्वारा संचालित की जा रही है। इन्दिरा आवास योजना के मजदूरी के घटक को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के साथ कनवरजेन्श किया गया है। 
    उन्होनें बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कनवरजेन्श से बनाये जाने वाले इन्दिरा आवासों की गुणवक्ता में सुधार होगा। 
सुश्री नेहा मारव्या ने बताया कि इन्दिरा आवास को बनाने में मजदूरी पर कुल किनती राशि व्यय होगी इस संबंध में भी परिषद द्वारा जानकारी चाही गई है, जो तकनीकी अमले से तैयार कराकर शीघ्र प्रेषित कर दी जाएगी।



                                                  कपिलधारा से मूलचंद के हुए सपने पूरे


 जबलपुर 28 नवम्बर 2014।काश हमारे खेत में भी कुंआ होता। हम भी तन-मन-धन से खेती करते हमारे खेत में भी फसलें लहलहाती। ये सपने हैं जिले की जनपद पंचायत जबलपुर की ग्राम पंचायत चैरई के मूलचंद का।
इन सपनों को हकीकत में बदला मनरेगा की उपयोजना कपिलधारा ने। इसी योजना के तहत मूलचंद के खेत में 2 लाख 45 हजार की लागत से कूप स्वीकृत किया गया, जिसमें ईश्वर की कृपा से पानी भी अच्छा निकला। अब कुंए में पानी होने एवं शासन से विद्युत पंप उपलब्ध होने के बाद से मूलचंद्र अपने खेतों में गेंहू व चना की फसल ले रही हैं। अपने खेतों में लहलहाती फसल को देखने का सपना पूरा हो गया है।
मूलचंद बताता हैं कि उसके परिवार में पांच लोग हैं। तीन एकड़ खेती होने के बावजूद भी परिवार की गुजर बसर पूरी करने के लिए अन्य जगह काम करना पड़ता था, क्योंकि खेतों में फसल तो बोते थे, लेकिन भगवान भरोसे। अब ऐसा नहीं है। खेतों में फसल भी बोते है और फसल की सिंचाई भी करते हैं।मूलचंद बताता है कि पानी होने की वजह से चना,गेहूं व मटर की खेती के साथ-साथ सब्जियां भी लगाई हैं, जिन्हें स्थानीय बाजार में बेंचकर आय अर्जित कर रही हूं।
 यहां के सरपंच श्रीमती धनियां बाई कड़ोपा बताती हैं कि मूलचंद्र की स्थिति पहले ठीक नहीं थी, उसके यहां खेती तो थी, लेकिन असिंचित होने की वजह से दूसरों के खेतों में काम करना पड़ता था। मनरेगा की उपयोजना कपिल धारा से मूलचंद्र की जीवन धारा में परिवर्तन आया है। इस योजना से एक तो खुद की जमीन सिंचित हो गई है, दूसरी ओर विद्युत पंप मिलने से जमीन भी उपजाऊ हो गई है।

सचिव श्री दिमांक पटैल ने बताया कि मूलचंद्र के यहां कपिल धारा योजना के तहत 2 लाख 45 हजार की लागत से कूप स्वीकृत किया गया था। जिसमें मूलचंद्र के परिवार के साथ-साथ गांव लगभग 50 जाॅबकार्ड धारी परिवारों को भी काम उपलब्ध कराया गया है।
                                                                         मीडिया अधिकारी 
जिला पंचायत जबलपुर

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