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Tuesday, 20 May 2014

कपिलधारा ने बदली इन्द्रर की तकदीर

कपिलधारा ने बदली इन्द्रर की तकदीर जबलपुर:19 मई2014। जबलपुर जिले के जनपद पंचायत जबलपुर की ग्राम पंचायत हिनौतिया भोई में इन्दर गौड गरीबी, तंगहाली और बेरोजगारी में जीवन जी रहा था। गांव में न तो मजदूरी मिलती थी और न ही अपने असिंचित खेत से भरपूर फसल ले सकता था। कभी-कभी तो असिंचित खेत से बोया गया बीज निकलना भी नही हो पाता था। परिवार का भरण पोषण करने के लिए उसे प्रतिदिन जबलपुर में आकर ठेकेदारों के यहाॅ मजदूरी करनी पडती थी। मजदूरी के लिए उसे घर से सुबह 6.00 बजे निकलना पड़ता था और शाम को घर देर से भी पहुॅचाता था। थकाहारा होने के कारण उसका स्वभाव भी चिड़चिडा हो गया था। उसकी इस समस्या से मनरेगा की कपिलधारा ने न सिर्फ निजात दिलाई बल्कि असिंचित खेत को सिंचित बना कर उसकी तकदीर बदल दी। इन्दर ने बताया घर में वृद्ध माता-पिता के अलावा मेरी पत्नी व दो बच्चे है, जिनका भरण पोषण करने के लिए मुझे जबलपुर जाकर मजदूरी का कार्य करना पडता था तब जाकर बडी मुश्किल से परिवार की गुजर बसर चलती थी। सरंपच व सचिव ने मनरेगा योजना की ग्राम सभा में जानकारी दी और हमारे खेत में कुआॅ स्वीकृत कर दिया। कुआॅ स्वीकृत होते ही पूरे परिवार सहित गांव के लोगों ने उपयंत्री, सरपंच/सचिव की देखरेख में देखते ही देखते कुएॅ का कार्य पूर्ण हो गया। भगवान की कृपा से कूप में बहुत पानी है। जिससे मेरी असिंचित एवं बंजर होती खेती लहलहाती उठी। आदिवासी विकास विभाग कुएं से फसल की सिंचाई के लिए 20 हजार रूपये अनुदान के रूप में दिये गये। जिसमें इलेक्ट्रिक पंप,स्ंिप्रग पाइप इत्यादि क्रय किये गये है। जिससे मैं अपनी खेती के साथ- साथ आस-पास के खेतो को भी सिंचाई कर 3 गुनी फसल कमा रहा हूॅ। इन्दर ने बताया घर पहले हमारे खेतों में हम केवल बरसात की फसल लिया करते थे।पानी गिर गया तो सोयाबीन की फसल एक क्विंटल बीज में 8-10 क्विंटल निकल आती थी लेकिन यदि पानी नहीं गिरा तो एक क्विंटल बीज में सिर्फ 2-4 क्विंटल ही फसल निकलती थी। लेकिन अब ऐसा नही है जब से मनरेगा की उपयोजना कपिलधारा के तहत हमारे खेतों में कुप खोदा गया हैं तब से हम सोयाबीन के साथ-साथ गेहू, चना की फसल ले रहे हैै जिनमें एक क्विंटल बीज में 15-20 क्विंटल फसल निकल रही है। इसके अलावा हम गर्मियों में सब्जी भी लगाकर दो से पांच हजार की हर माह आय हो रही है। सच कहु तो मनरेगा योजना मेरी तकदीर बदल दी है।

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