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Friday, 2 September 2016

2-9-2016


कार्यालय जिला पंचायत जबलपुर
जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक आज
जबलपुर 2सितम्बर 2016। जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक तीन सितम्बर  शनिवार को दोपहर 12ः30 से जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित की गई है।
 जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीप्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि तीन सितम्बर को आयोजित होने वाली सामान्य सभा की बैैठक में विगत बैठक का पालन प्रतिवेदन पर चर्चा के साथ-साथ प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के द्वितीय डी.आर.आर.पी. का अनुमोदन पर चर्चा, शिक्षा विभाग एवं राजीव गांधी शिक्षा मिशन की समस्त योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ अशासकीय संस्थाओं में गरीब परिवारों के बच्चों को किन-किन शालाओं में प्रवेश दिये जाने की समीक्षा, मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किये जारहे कार्यो की समीक्षा एवं आदिवासी विकास विभाग की समस्त योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।
उन्होने बताया कि समान्य सभा की बैठक जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती मनोरमा पटेल की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी।

आंगनवाडी केन्द्र से बच्चों को मिल रही खुशियां
जबलपुर 2सितम्बर 2016। महात्मा गाधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना एवं महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त कनवरजेंस से जनपद पंचायत शहपुरा की ग्राम पंचायत सिहोदा में बनाई गई आंगनवाडी  से गांव के बच्चों को खुशियां मिल रही हैं। आंगनवाडी में छोटे-छोटे बच्चों को प्रारंभिक ज्ञान के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य की भी देखभाल की जाती है। बच्चों को पोषण आहार के रुप में खिचडी, उपमा एवं हलुवा एवं खाने में प्रतिदिन तैयार किये गये मीनू के आधार पर खाना दिया जा रहा है। धात्री महिलाओं को पोषण आहार के पैकिट एवं गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा टीके भी लगाये जाते है। आगंनवाडी में बच्चों को खुशियां देने के लिए जन्मदिवस एवं गोदभराई के कार्यक्रम भी किये जाते हैं। 
ग्राम पंचायत सिहोदा की सरपंच श्रीमती मीराबाई पटेल ने बताया कि गांव में आगनवाडी बनने से गांव के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य की भी देखभाल की जा रही है। मनरेगा एवं महिला बाल विकास विकास विभाग के अभिसरण से 6लाख 80 हजार की लागत से आंगनवाडी केन्द्र बनाया गया है। आंगनवाडी केन्द्र बन जाने से बच्चों के साथ-साथ गांव की महिलाओं को भी लाभ हो रहा है। 
 आंगनवाडी केन्द्र की कार्यकर्ता श्रीमती सीमा चढार ने बताया कि आंगनवाडी भवन बनने से आंगनवाडी में आने वाले बच्चों को खेलने के लिए बडी जगह मिल गई। आंगनवाडी केन्द्र में वर्तमान में 3वर्ष से लेकर 6 वर्ष के 64 बच्चें दर्ज हैं। आंगनवाडी प्रतिदिन सुबह 9ः30 बजे खुलती है आगनवाडी केन्द्र में बच्चों को सुबह नास्ता एवं खाना प्रतिदिन निर्धारित किये गये मीनू के अनुसार दिया जाता है। नास्ते में सोमवार एवं गुरुवार को खिचडी, मंगलवार एवं शुक्रवार को उपमा एवं बुधवार एवं शनिवार को हलुवा दिया जाता है। इसी प्रकार खाने में सोमवार एवं बुधवार को दाल,रोटी एवं सब्जी, मंगलवार को खीर-पुडी और सब्जी, गुरुवार को कडी चावल, शुक्रवार को मूंग की दाल एवं सब्जी रोटी और शनिवार को पराठा एवं मिक्स सब्जी के रुप में बच्चों को पोषण आहार दिया जा रहा है।   
उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी के न होने से ग्राम के ननिहाल छोटे-छोटे बच्चों में स्वास्थ्य, पोषण से संबंधित आहार की प्रतिपूर्ति नही होने से उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था। साथ ही गर्भवती महिलाओं को गर्भकाल के दौरान दिए जाने वाले पोषक आहार एवं स्वास्थ्य संबंधी तथा किशोरी एवं धात्री महिलाओं हेतु पोषण आहार तथा स्वास्थ्य संबंधी अनेकों समस्याओं से जुझना पड़ता था। लेकिन अब एंसा नही है।
गाॅव में यह आंगनवाड़ी खुलने से ग्राम की धात्री महिलायें एवं गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर स्वास्थय जाॅच होगी तथा अब गांव का कोई बच्चा कुपोषण का शिकार नहीं होगा और न ही महिलाओं के स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। समय-समय पर आंगनबाड़ी सहायिका द्वारा बच्चों का वजन किया जाता है। तथा महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी टीकें एवं दवाईयां वितरीत की जा रही है। सही मायने में कहा जाये तो ग्राम में शिशु एवं मातृत्व मृत्युदर में गिरावट आयी है। समय पर इलाज की सलाह मिलने एवं प्राथमिक चिकित्सीय सलाह प्रदाय होने से शिशु एवं मातृत्व स्वास्थ्य में सुधार आया है इस हेतु मनरेगा योजना कारगार साबित हुयी है।
यहां के रोजगार सहायक कविता दुबे ने बताया कि मनरेगा योजनान्तर्गत की उपयोजना आंगनबाड़ी भवन निर्माण के तहत कार्य को कार्ययोजना में शामिल करते हुए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कराया गया है। मनरेगा एवं महिला बाल विकास के अभिसरण से बने आंगनवाडी केन्द्र से बच्चों को खुशिया मिल रही हैं। मनरेगा एक ऐसी योजना से जिसके तहत ग्रामों में परिसम्पतियों का निर्माण कराये जाने के साथ-साथ ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध करा रही है। योजना में काम करने वाले श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आ रहा है। 



मीडिया अधिकारी जिला पंचायत जबलपुर

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