कार्यालय,जिला पंचायत जबलपुर
// प्रेस विज्ञप्ति //
‘‘ग्रीन इंडिया मिशन‘‘ के तहत
मनरेगा व उद्यानिकी के अभिसरण से होगा नवीन बागानों का विस्तार
दस वर्षो में 50 लाख हैक्टेयर में वृक्षारोपण करके 30 लाख मनरेगा के पात्र परिवारों को जोड़ने भारत सरकार का लक्ष्य
जबलपुर 10जुलाई 2015- महात्मा गाॅधी नरेगा व उद्यानिकी विभाग के तकनीकी अभिसरण से नवीन बागानों की स्थापना क्षेत्र विस्तार के कार्य कराये जाएगें। भारत सरकार से प्राप्त निर्देश के तहत ‘‘ग्रीन इंडिया मिशन‘‘ के तहत महात्मा गाॅधी नरेगा एवं जीआईएम कनवर्जेन्स गाइडलाइन जारी की गई है। इसके तहत मनरेगा के पात्र हितग्राहियों की आजीविका विकास को उद्यानिकी, रेशम, वृक्षारोपण एवं फाॅर्म फोरेस्टी से जोड़ा जावेगा।
देश भर में आने वाले दस वर्षो में 50 लाख हैक्टेयर में वृक्षारोपण करके 30 लाख मनरेगा पात्र परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य भारत सरकार द्वारा रखा गया है। उद्यानकी विभाग की कार्ययोजना की आयोजना तैयार की गई है। जिसके तहत उद्यानिकी फल उत्पादन बढ़ाने का कार्य कराया जावेगा। नवीन बागानों की स्थापना क्षेत्र विस्तार में मनरेगा योजना से अभिसरण करते हुए सभी प्रकार के प्राक्कलन लागत पर सामग्री मद में कृषक अंश 25 प्रतिशत निर्धारित करते हुए कार्ययोजना का निर्माण किया गया है। शेष राशि का अभिसरण महात्मा गाॅधी नरेगा मद से किया जावेगा। उद्यानकी क्षेत्र में वृद्वि पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के साथ-साथ ग्लोबल वार्मिग को कम कर मनरेगा में पात्र हितग्राहियों की अजीविका सुनिश्चित होगी।
मनरेगा में पात्र हितग्राहियांे (जाॅबकार्डधारियों) को उनकी माॅग अनुसार 100 दिवस का रोजगार प्रदान करने के साथ उनकी निजी स्वामित्व वाली भूमि पर स्वरोजगार के अवसर प्रदान किया जायेगा। उद्यानकी फसलों के क्षेत्रफल गुणवत्ता, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि कर मध्यप्रदेश निर्माण के घोषित संकल्प की पूर्ति होगी। पात्र हितग्राहियों के आर्थिक स्तर में वृद्धि कर गरीबी रेखा की सूची से उपर उठाना। युवा व शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध कराना। फलदार पौधों का प्रत्यारोपण कर पात्र हितग्राहियों को स्थायी स्त्रोत के साधन उपलब्ध होगे। खेतिहर मजदूरों को स्वरोजगार प्रदान कर ग्रामों से शहर की ओर पलायन करने से रोकना।
भू-जल संरक्षण व संवर्धन करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्लोबल वार्मिग को कम करना। क्लस्टर में कार्य कर ग्रामों को उद्यानकी ग्रामों के रूप में विकसित करना। स्थानीय स्तर पर उद्यानिकी उत्पादन की आवश्यकता की सरल व सस्ते दरों पर पूर्ति करना, कुपोषण से बचाव के प्रयास करना तथा उद्यानकी प्रोसेसिंग व प्रसंस्करण ईकाई लगाने हेतु प्रेरित एवं उद्योगपतियों या अनुबंधकर्ताओं को कच्चे माल की पूर्ति करना है।
जिले में जहाॅ भी उद्यानकी फसले ली जा रही है, उन्ही ग्राम पंचायतों को क्लस्टर के रूप में चयनित कर प्राथमिकता के आधार पर (न्यूनतम 10 हितग्राही एक ही ग्राम पंचायत के होने पर) उक्त योजना अंतर्गत कार्य प्रारंभ किया जावेगा। एक क्लस्टर (ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी का क्षेत्र) में न्यूनतम 50 हितग्राही होना अनिवार्य होगा जो 10 किलोमीटर की परिधि के भीतर होगे। नये बागानों के स्थापना क्षेत्र में प्रथम वर्ष होने के कारण जिले बार लक्ष्यों का निर्धारण कर मनरेगा-उद्यानिकी अभिसरण कार्ययोजना से कार्य किया जावेगा। योजना अंतर्गत पात्र हितग्राही वही होगा, जिसके पास स्वयं की भू-स्वामित्व वाली न्यूनतम 0.4 हेक्टैयर भूमि उपलब्ध, स्वयं का सिचाई साधन होगा। स्वयं की सुरक्षा व्यवस्था फैसिंग इत्यादि उपलब्ध होगी। अर्थात् पात्र हितग्राही की यह जबावदारी होगी कि लगाये जाने वाले उद्यानिकी फलोद्यान को वह स्वयं के साधन से सुरक्षा व्यवस्था व सिचाई व्यवस्था करेगा। इसके साथ ही उसका जाॅबकार्ड होना अनिवार्य होगा।
मनरेगा अधिनियम के दृष्टिगत प्राथमिकता क्रम में पात्र हितग्राही निम्नानुसार होगे- अनुसूचित जाति परिवार, अनुसूचित जनजाति परिवार, आदिम जनजाति परिवार, अधिसूचित अनुसूचित जनजाति परिवार, अन्य गरीबी रेखा वाले परिवार, ऐसे परिवार जिनके मुखिया विधवा महिला, भूमि सुधार के लाभार्थी परिवार, इंदिरा आवास योजना के हितग्राही, वन अधिकार अधिनियम लाभान्वित हक प्रमाण पत्र धारक तथा लघु व सीमान्त कृषक होगे।
योजना में सभी प्रकार बहुवर्षीय स्थाई आय प्रदाय करने वाले फल, फूल, औषधि व सुगंधित बागानों को नवीन स्थापना हेतु शामिल किया गया है। इसके साथ ही शीघ्र आमदनी प्राप्त करने के लिए स्थाई पौधों के साथ अतरवर्ती उद्यान के रूप में संकर केला व पतीता के पौधे योजना में शामिल किये जावेगे। पपीता एवं केला स्थाई फल न होने के कारण पृथक से कार्य योजना में शामिल नही किया गया है।
मनरेगा योजना में हितग्राही को मजदूरी भुगतान व सामग्री प्रदाय मनरेगा योजना में पौध रोपड़ उपरान्त लगाये गए स्थायी फलदार पौधों का 90 प्रतिशत जीवितता होने व उसमें निदाई, गुड़ाई, सिंचाई व अन्य प्रबंधन कार्य करने पर ही डीपीआर अनुसार प्रतिमाह एक एकड़ सीमा तक के हितग्राहियों को टाॅस्क आधार पर ब्लाक प्लांटेशन के रूप में अधिक्तम 280 पौधरोपण पर 5 रूपये प्रतिपौधा प्रतिमाह एवं खेतों की मेढ़ों पर प्लांटेशन के रूप मे अधिकतम 200 पौधरोपण पर 7.50 रूपये प्रतिपोधा प्रतिमाह भुगतान हितग्राहियों के खाते मे ंकिया जा सकेगा। जिसमें (सामान्य/वनपट्टाधारी जाॅबकार्ड धारक) 100/150 दिवस से अधिक मजदूरी होने पर शेष राशि का भुगतान सेमीस्किल्ड के रूप में सामग्री मद अंतर्गत किया जा सकेगा। पौधों की 90 से अधिक प्रतिशत जीवितता पर पूर्ण भुगतान, 75 से अधिक होने पर आधा भुगतान तथा 75 प्रतिशत से कम होने पर कोई भुगतान नही किया जावेगा।
उप /सहायक संचालक उद्यान विभाग कार्य एजेन्सी होगे। कार्य एजेन्सी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के माध्यम से मजदूरी व सामग्री भुगतान के अधिकार प्रदाय किये जावेगें। इलेक्ट्रानिक फण्ड मैनेजमेन्ट सिस्टम से राशि सीधे मजदूरों के खाते में व सामग्री प्रदाय कर्ता के खाते में राशि का स्थानांतरण किया जावेगा। कार्य एजेन्सी द्वारा स्वयं जाॅबकार्ड धारियों की माॅग अनुसार मेट/रोजगार साहयक के माध्यम से ई-मस्टर जारी किये जावेगे, मूल्यांकन उपरांत ई-एमबी पर दर्ज करते हुए भुगतान किया जावेगा। पृथक से भी प्रत्येक हितग्राहीवार रिकार्ड संधारण किया जावेगा।
मनरेगा में मोबाईल माॅनिटरिंग सिस्टम जल्द
मोबाईल एप्पस में दर्ज की जायेगी रोजगार की मांग
जबलपुर 10जुलाई 2015। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नेहा मारव्या ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजागर गारंटी योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर से अभिनव पहल किये जा रहे हैं। अब मजदूरों की मांग, कार्य आवंटन, मस्टररोल पर प्रतिदिवस की उपस्थिति तथा मस्टररोल पर कार्य मूल्यांकन मनरेगा साॅफ्टवेयर मोबाईल एप्लीकेशन के माध्यम से प्राप्त करने के दिशा-निर्देश प्राप्त हुये हैं। इस प्रणाली को लागू करने से पहले जिला व जनपद स्तर के अधिकारियों को भोपाल में प्रशिक्षण दिया जायेगा।
उन्होनें बताया कि उक्त एप्लीकेशन आंफलाईन मोड में कार्य करेगी, जिसमें नरेगा साॅफ्टवेयर में पंजीकृत मोबाईल डिवाईज को डाटा कनेक्टिविटी जोन में आने पर डाटा स्वतः ही अपलोड हो जायेगा। ग्राम पंचायत के ग्राम रोजागार सहायक द्वारा रोजगार की मांग, कार्य आवंटन एवं दैनिक उपस्थिति की जानकारी, मोबाईल एप्पस के माध्यम से दर्ज की जायेगी तथा उपयंत्री द्वारा साप्ताहिक मूल्यांकन की जानकारी कार्य स्थल से प्राप्त की जायेगी, जिससे कि वास्तविक कार्य स्थल के जियो टेग तथा मूल्यांकन दिनांक एवं कार्य का फोटोग्राफ्स की वास्तविक स्थिति रियल मोड में प्राप्त हो सके। मनरेगा साॅफ्टवेयर मोबाईल एप्लीकेशन सिस्टम का परीक्षण 3 जिलों में मई व जून माह में किया जा चुका है। फैवलेट्स हेतु विभाग द्वारा पूर्व में ही निर्देश जारी किये जा चुके हैं। एमपी स्वान नेटवर्क के माध्यम से मोबाईल सिम को कंफिगर कर सुरक्षित डाटा उपलोडिंग हेतु डाटा प्लान उपलब्ध कराने हेतु कार्यवाही की जा रही है।
मोबाईल मांनिटरिंग सिस्टम के प्रशिक्षण हेतु 1 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन दिनांक 21 से 23 जुलाई 2015 तक क्षेत्रीय ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान नीलबढ भोपाल में किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में परियोजना अधिकारी, वरिष्ठ डाटा प्रबंधक जिला पंचायत के तथा जनपद स्तर से एक उपयंत्री, एक अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा, तथा1 ग्राम रोजगार सहायक ग्राम पंचायत को स्मार्ट फोन/लेपटाप सहित प्रशिक्षण संस्थान में उपस्थित होने के निर्देश दिये गये हैं। जिला जनपद स्तर के अधिकारियों तथा ग्राम पंचायत स्तर के रोजगार सहायक/सचिव, ग्राम एवं उपयंत्रियों का प्रशिक्षण दिनांक 30 अगस्त 2015 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
मीडिया अधिकारी
जिला पंचायत जबलपुर
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