कार्यालय जिला पंचायत जबलपुर
//समाचार//
ट्रांजिट वाॅक के माध्यम से करे हितग्राहियों का चयन
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने दिये निर्देश
जबलपुर। 16 जुलाई 2014-महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी की उपयोजना मेरा खेत मेरी माटी का लाभ हितग्राहियों को देने के लिए कार्यों का चयन ग्राम-पंचायत के सरपंच, सचिव, उपयंत्री, ग्राम रोजगार सहायक, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा ग्रामीण हितग्राहियों के संयुक्त दल द्वारा ट्रांजिट वॉक कर हितग्राहियों का चयन किया जाये। उक्त निर्देश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शीलेन्द्र सिंह ने आज जिला पंचायत के सभा कक्ष में आयोजित बैठक में दिये।
उन्होने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से किये जा रहे सघन प्रयासों के अंतर्गत अब मनरेगा कन्वर्जेंस से मेरा खेत-मेरी माटी उप-योजना की शुरूआत की गई है। इस उप-योजना का लाभ लेने के लिए लघु एवं सीमांत कृषक, जो महात्मा गाँधी नरेगा के अंतर्गत विभिन्न श्रेणी में पात्रता रखते हैं, उनकी कृषि योग्य तथा गैर-कृषि योग्य भूमि पर हितग्राही मूलक कार्य किये जा सकेंगे।
उन्होनें बताया कि इस महती योजना से फसलों की उत्पादकता तथा कुल उत्पादन में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ कृषकों की वार्षिक आमदनी में भी व्यापक इजाफा होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा शुरू की जा रही इस अनूठी उप-योजना का क्रियान्वयन किसान-कल्याण तथा कृषि विकास एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा मनरेगा अभिसरण से किया जायेगा। बताया कि मेरा खेत-मेरी माटी उप-योजना में ऐसे लघु-सीमांत कृषक, जो मनरेगा जॉब-कार्डधारी हैं, उनके मालिकाना हक की कृषि भूमि तथा उनके स्वयं के निवास की भूमि पर हितग्राही मूलक कार्य मनरेगा कन्वर्जेंस से करवाये जा सकेंगे।
श्री सिंह ने बताया कि मनरेगा मद से किये जाने वाले कार्यों की क्रियान्वयन एजेंसी संबंधित ग्राम-पंचायत होगी। कार्य सम्पादन ई-मस्टर रोल पद्धति से जॉब-कार्डधारी श्रमिकों द्वारा किया जायेगा। जॉब-कार्डधारी कृषक परिवार अथवा परिवार के किसी सदस्य द्वारा स्वयं की भूमि में कार्य सम्पादन में स्वयं कार्य करना होगा। इसकी मजदूरी उन्हें भी अन्य श्रमिकों के समान प्राप्त होगी।
इस उप-योजना में अनुसूचित-जाति, अनुसूचित-जनजाति, आदिम-जनजाति, अधिसूचित-जनजाति और अन्य गरीबी रेखा वाले परिवार को पात्रता होगी। इसके साथ ही ऐसे परिवार, जिनकी मुखिया महिला है अथवा जिनके मुखिया निःशक्त हैं या जो परिवार भूमि सुधार के लाभार्थी हैं, उन्हें भी उप-योजना से लाभान्वित किया जा सकेगा। इसी तरह इंदिरा आवास योजना के हितग्राही, वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत हक प्रमाण-पत्र धारक लाभान्वित हितग्राही तथा ऐसे लघु और सीमांत कृषक, जो कृषि ऋण माफी एवं राहत योजना-2008 में यथा परिभाषित हैं, ऐसे परिवार भी इस उप-योजना का लाभ ले सकेंगे।
उन्होनें बताया कि महात्मा गाँधी नरेगा के क्रियान्वयन संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार उपरोक्त श्रेणी के परिवार के खेत-खलिहान में व्यक्तिगत कार्य विभिन्न शर्तों के आधार पर हो सकेंगे। इन शर्तों के अनुसार ऐसे परिवार का जॉब-कार्डधारी होना आवश्यक होगा। लाभार्थी अपनी खेत-खलिहान की भूमि अथवा कृषक के निवास की भूमि पर शुरू की गई परियोजना पर कार्य कर सकेंगे। लाभार्थी की भूमि या कृषक के निवास की भूमि पर लिये जाने वाले कार्य संबंधित ग्राम-पंचायत के शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट का अनिवार्य हिस्सा होंगे। इस उप-योजना में कृषि योग्य भूमि पर भूमि समतलीकरण तथा भूमि सुधार, मेढ़ बँधान, कपिलधारा उप-योजना में कुआँ निर्माण, फार्म पोंड निर्माण, नाला-बँधान या लघु स्टॉप डेम, नर्सरी निर्माण, कृषि उद्यानिकी तथा कृषि वानिकी के कार्य किये जा सकेंगे। इसी तरह गैर-कृषि योग्य भूमि पर नॉडेप निर्माण, बॉयोगैस निर्माण, बर्मी कम्पोस्ट, गाय-भैंस, बकरी, सुअर, मुर्गीपालन के लिये शेड निर्माण जैसे कार्य किये जा सकेंगे।
इसी प्रकार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से संबद्ध स्व-सहायता समूहों के लिये बॉयो खाद एवं कृषि उत्पाद को रखने के लिये छोटे गोदाम तथा स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों के लिये सामुदायिक शेड का निर्माण करवाया जा सकेगा। ऐसे कार्यों का चयन ग्राम-पंचायत के सरपंच, सचिव, उप यंत्री, ग्राम रोजगार सहायक, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा ग्रामीण हितग्राहियों के संयुक्त दल द्वारा ट्रांजिट वॉक कर किया जायेगा।
इस मकसद से वे ग्राम का भ्रमण कर परिवारवार और खेतवार कार्य का चिन्हांकन एवं स्थल चयन करेंगे। स्थल चयन के बाद उप यंत्री तथा ग्रामीण कृषि विकास विस्तार अधिकारी द्वारा मौके पर सभी माप लेकर ही संयुक्त रूप से प्राक्कलन तैयार किया जायेगा। इसमें मजदूरी सामग्री अनुपात 60रू40 की स्थिति, कार्य में सृजित होने वाले मानव दिवस, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की संभावित तिथि, चयनित स्थल पर भूमि की उपलब्धता तथा कार्य की उपयोगिता जैसी जानकारियाँ आवश्यक रूप से दर्ज होंगी। प्रत्येक ग्राम-पंचायत में करवाये जाने वाले कार्यों को सामुदायिक तथा हितग्राहीमूलक कार्यों की श्रेणी में सूचीबद्ध किया जायेगा।
बैठक में कृषि विभाग के उपसंचालक आर.डी. सिलावट ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त योजना से एक ओर किसानों को लाभ मिलेगा एवं दूसरी ओर गांव के बेरोजगार लोगों को गांव में ही काम उपलब्ध कराया जायेगा। मेरा खेत मेरी माटी के तहत कृषि योग्य एवं गैर कृषि योग्य कार्य किये जाने है कृषि योग्य कार्य किसानों की फसलों की पैदावार बढाने के उद्देश्य से किये जायेगें।
बैठक में ये रहे उपस्थित मनरेगा की परियोजना अधिकारी कल्पना पाण्डेय, कृषि विभाग के उपसंचालक आर.डी.सिलावट, मेरा खेत मेरी माटी के जिला समन्वयक श्री किरार, सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक यंत्री, कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी एवं कृषि विकास अधिकारी मौजूद रहें।

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