कार्यालय, जिला पंचायत जबलपुर
तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस सभी जनपद एवं ग्राम पंचायतों में होगा योग
जबलपुर 19जून 2017। जिला पंचायत के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी टी.एस. मरावी ने सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी कर 21जून बुधवार को प्रातः 7ः00 बजे से 8:00के मध्य सभी जनपद स्तर एवं सभी ग्राम पंचायतों में तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सामूहिक योग के कार्यक्रम आयोजित किये जाये। सामूहिक कार्यक्रमों में ग्राम पंचायतों के सभी जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करते हुए सामूहिक योग किया जाये।
प्रत्येक गांव में दो-दो स्थानों पर होगा पौधारोपण
लगेगे पांच लाख पौधे, पौधों की सुरक्षा करेगा पौधरक्षक
जबलपुर 19जून2017। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जिले की 516 ग्राम पंचायतों के 1336 गांवों में दो-दो स्थानों पर लगभग पांच लाख पौधें रोपे जाएगे। रोपे जाने वाले पौधों की सुरक्षा के लिए गांवों में पौधरक्षक को जिम्मेदारी दी जा रही है। पर्यावरण संरक्षण को बढावा देने के लिए प्रत्येक गांव मेें शासन से प्राप्त निर्देशानुसार पौधारोपण करने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। जिसमें सकडों के दोनो ओर व नहर किनारे, सार्वजनिक भवन परिसरों में जैसे मोक्षधाम, खेल मैदान, विद्यालय, छात्रवास, पंचायत भवन,सामुदायिक भवन के साथ-साथ शासकीय भूमि पर सामुदायिक रुप से पौधारोपण किया जाएगा।
जिला पंचायत के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी टी.एस. मरावी ने बताया कि मनरेगा योजना के तहत जिले के प्रत्येक ग्राम में दो-दो स्थानों पर पौधारोपण की कार्ययोजना बनाकर कार्य प्रारंभ किया गया है। जिसमें लगभग पांच लाख पौधें रोपे जाना संभावित है। गांवों में पोधारोपण करने के लिए वृहृद स्तर पर गढढों की खुदाई का कार्य प्रारंभ किये गये है।
मनरेगा के परियोजना अधिकारी प्रदीप उपासे ने बताया कि जिले में सडकों के किनारे, सामुदायिक एवं सार्वजनिक स्थलों पर पौधारोपण के लिए शासन ने इस बार रोपित की जाने वाली पौधों की प्रजातियां भी तय कर दी है। सडक किनारे, आम, इमली, जामुन, महुआ, नीम, करंज, मुनगा, अर्जुन, पीपल,बरगद बांस आदि के पौधे रोपित किये जायेंगे। सामुदायिक स्थल पर आम, जामुन, नीम, आंवला, नीबू, अमरूद, मीठी नीम, सीताफल, मुनगा, बेर, पीपल, बांस आदि के पौधे लगाये जाये। इसी प्रकार सार्वजनिक परिसर जैसे विद्यालयों, छात्रावास, खेल मैदान, मोक्षधाम आदि परिसर के चारों तरफ, आम, करंज, नीम, आंवला, मुनगा एवं बांस आदि के पौधों का रोपण किये जाएगा।
श्री उपासे ने बताया कि सामुदायिक स्थल पर रोपित पौधों की सुरक्षा हेतु सीपीटी खुदाई एवं उसके बंड पर प्रोसोपिल, बबूल, खेर के बीज को लगाना। सार्वजनिक परिसरों में रोपित पौधों की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवाल नहीं होने की स्थिति में कंटीली झाडी,बांस के ट्रीगार्ड, कंटीले तार से की जावेगी। वृक्षारोपण परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी संबंधित ग्राम की वन समिति, स्व-सहायता समूह जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन-तेजस्वनी के तहत गठित किया गया हो, क्षेत्र के उस सक्रिय गैर शासकीय संस्था अथवा संबंधित ग्राम पंचायत हो सकती है। क्रियान्वयन एजेंसी को निर्धारित मानक अनुसार पौधों की संख्या को यूनिट मानकार प्रति युनिट एक पौधरक्षक की व्यवस्था करना होगी। ग्राम में अथवा ग्राम के सार्वजनिक परिसरों जैसे-स्कूल, छात्रावास, सार्वजनिक भवन, मोक्षधाम, आदि में सफाई वे सुरक्षा के लिये अंशकालीन मानदेय पर कार्यरत जांबकार्डधारी उपलब्ध हो तो उसे पौधरक्षक बनाने में सर्वोच्च प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा। पौधरक्षक संबंधित ग्राम का निवासी मनरेगा का जांबकार्डधारी होना चाहिए। पौधरक्षक के पास उसकी स्वयं की साईकल होना चाहिए ताकि साईकल पर वह डिब्बा या केन लगाकर सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था कर पौधों की सिंचाई कर सके।
उन्होनें बताया कि वृक्षारोपण परियोजना की अवधि तथा मानक लागत भी निर्धारित कर दी गई है जिसके तहत सडक किनारे, सार्वजनिक परिसर हेतु पांच वर्ष व नहर किनारे हेतु तीन वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही पौधों का अंतरात, पौधों की संख्या, परियोजना की मानक लागत, पौधों की लागत, प्रथम से पंचम वर्ष तक वर्षवार सामग्री, श्रम दिवस भी निर्धारित किये गये है, जिसमें प्रथम वर्ष में मानक लागत का भुगतान 4 किस्तों में एवं द्वितीय वर्ष और इसके पश्चात प्रतिवर्ष भुगतान 3 किस्तों में किया जायेगा। प्रथम वर्ष के अंत में वर्षा ऋतु के आगमन तक जीवित पौधों की 80 प्रतिशत संख्या, द्वितीय वर्ष के अंत में वर्षा ऋतु के आगमन तक जीवित पौधों की 90 प्रतिशत संख्याए तृतीय वर्ष 95 प्रतिशत एवं चतुर्थ एवं पंचम वर्ष के अंत में वर्षा ऋतु के आगमन तक जीवित पौधों की शतप्रतिशत संख्या होना अनिवार्य हैै। यदि जीवित पौधों की उक्तानुसार मात्रा कम होने की दशा में प्रत्येक वर्ष की अंतिम किस्त की राशि स्वतः शून्य हो जाएगी और कोई भुगतान देय नहीं होगा।
ग्राम पंचायत प्रतिवर्ष जीवित पौधों की गणना कराकर अपनी स्टांक पंजी में पृविष्ट करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि क्रियान्वयन एजेंसी वृक्षारोपण का रख रखाव करें। पर्यवेक्षण हेतु प्रति परियोजना अवधि में प्रतिवर्ष ग्राम पंचायत को प्रति परियोजना रूपये 5 हजार का भुगतान निर्धारित शर्त पूरी होने की दशा में सामग्री मद से किया जाएगा। परियोजना अवधि पूर्ण होने पर पौधरक्षक को परियोजना से प्राप्त होने वाले लाभ का 50 प्रतिशत रखने का अधिकार होगा। शेष 50 प्रतिशत पर ग्राम पंचायत का अधिकार होगा और उसका निपटारा ग्राम पंचायत करेगी।
उन्नीस हजार पांच सौ श्रमिक कार्यरत- मनरेगा के परियोजना अधिकारी प्रदीप उपासे ने बताया कि जिले में मनरेगा योजना के तहत जिले की 516 ग्राम पंचायतों वृक्षारोपण, मोक्षधाम, खेलमैदान सुदूर सडक व हितैषी कपिलधारा के 17871 कार्य प्रगतिरत हैं। जिनमें 13949 कार्य व्यक्तिगत एवं 3922 कार्य सामुदायिक शामिल है। योजना के तहत आज के दिन जिले में 19553 मजदूर कार्यरत है, जिसमें जनपद पंचायत जबलपुर की 80 ग्राम पंचायतों में 3327 मजदूर, कुण्डम की 68 ग्राम पंचायतों में 4272 मजदूर, मझौली की 84 ग्राम पंचायतों में 4908 मजदूर, पनागर की 62 ग्राम पंचायतों में 1359 मजदूर, पाटन की 78 ग्राम पंचायतों में 1796 मजदूर, शहपुरा की 84 ग्राम पंचायतों में 2795 श्रमिक एवं जनपद पंचायत सिहोरा की 60 ग्राम पंचायतों में 1096 श्रमिक शामिल है।
श्री उपासे ने बताया कि जिले के प्रत्येक गांव में दो-दो स्थानों पर वृक्षारोपण के कार्य प्रांरभ होने से आने वाले दिनों में योजना में कार्य करने वाले श्रमिकों की संख्या में और बढोत्तरी होगी।
मीडिया अधिकारी जिला पंचायत जबलपुर