कार्यालय जिला पंचायत जबलपुर
//प्रेस विज्ञप्ति//
मनरेगा की उपयोजना निर्मल नीर से बुझ रही पूरे गांव की प्यास
सफलता की कहानी
जबलपुर 28मई 2015ः जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है। हम सब जानते हैं हमारे लिए जल कितना महत्वपूर्ण है। गांव से रीत रहे जल रूपी अमृत ने समूचे गावं को गये साल तक चिंता में डाल रखा था आलम यह था कि एक एक बंूद पानी के लिये समूची ग्रह व्यवस्था हासिये पर थी। पानी की व्यवस्था के लिए अल सुबह से ही प्रयास शुरू हो जाते थे जिससे ग्रहणियों के न सिर्फ कार्य प्रभावित होते थे बल्कि बच्चों व परिवार के अन्य सदस्यों की दिनचर्या बदल जाती थी, लेकिन अब ऐसा नही है गांव के आंगन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना की उपयोजना निर्मल नीर के अंतर्गत खुदवाये गये कूप ने गांव की पानी की समस्या को खत्म कर दिया है। यह कहानी है जबलपुर जिला मुख्यालय से 49 किमी. एवं विकास खण्ड शहपुरा से 17 किमी. दूर ग्राम पंचायत कुलौन के अन्तर्गत आने वाले गांव पिपरिया में रहने वाले लोगों की।
ग्राम पंचायत कुलौन का ग्राम पिपरिया पहाडी पर स्थित होने के कारण गांव में हमेशा पेयजल संकट बना रहता था गर्मी के मौसम में पानी के लिए बहुत परेशान होना पड़ता था, ग्राम में एक ही हैण्डपंप होने के कारण लोग सुबह से ही हैण्डपंप के सामने लम्बी-लम्बी लाइनें लगाकर अपने बारी आने का इतंजार करते रहते थे। ग्राम के शंकर लाल यादव बताते हैं कि गांव में पानी के लिए पहले बडी परेशानी होती थी, गांव में केवल एक ही हेण्डपंप था उसी से पूरा गांव पानी पीता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। ग्राम में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना की उपयोजना निर्मल नीर के अंतर्गत खुदवाये गये कूप से पीनी की समस्या से हमेशा-हमेशा के लिए निजात मिल गई है।
यहां के सरपंच श्रीमति मुन्नीबाई बताती है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना की उपयोजना निर्मल नीर से न सिर्फ गांव वालों की वर्षों पुरानी समस्या का निराकरण हुआ है बल्कि गांव वालों की आर्थिक स्थिति भी सुधर गई है।
पूर्व सरपंच दशरथ सिंह गौड ने बताया कि गांव में पानी की सबसे बडी समस्या थी पानी नही होने की वजह से गांव में आये दिन लडाई झगडे हुआ करते थे, मनरेगा की उपयोजना के तहत सामुदायिक कूप खोदने का ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया गया है और उस प्रस्ताव को जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत से स्वीकृति मिलने के बाद प्रारंभ किया गया।
गांव के सुरेश बताते है कि पहले गांव में कुआ नही था और पानी की हमेशा परेशानी होती थी, गांव के हेण्डपंपों से रात भर पानी भरते थे। घर की महिलाएं तनाव में जीने लगी थी। क्योंकि उन्हें दिन में घर के कार्य और रात में पानी भरना पडता था। भला हो मनरेगा की उपयोजना निर्मल नीर का जिसने गांव की प्यास बुझा दी। रामवती, सुशीला, रेवती, बताती है कि घर में पानी नही होने की वजह से परिवार में आये दिन लडाई झगडें होते थे, हमारी बेटियां स्कूल नही जा पाती थी। घर के लोग सुबह काम पर नही पहुॅच पाते थे। अब ऐसा नही है। गांव में खोदे गये कूप से पूरा गांव पानी भर रहा है।
सचिव दीपनारायण ने बताया कि गांव वालों नंे वर्षो पुरानी समस्या से छुटकारा पाने के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया गया। निर्मल नीर बनाने के लिए 3.17 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी,जबकि निर्मल नीर 2.76 लाख में बनकर तैयार ही गया निर्मल नीर की गहराई 60 फुट है। और उसमें वर्तमान में लगभग 30 फुट पानी भरा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि मनरेगा ग्रीमीण क्षेत्रों के सर्वागीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।
कोहला में आज होगी चैपाल
जबलपुर 28 मई 2015ः सांसद आर्दश ग्राम योजना के तहत चिन्हित ग्राम कोहला में 29 मई 2015 को शामः 6ः00 बजे से चैपाल का आयोजित की गई है।
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नेहा मारव्या ने जिलें के सभी विभागों के प्रमुखों को चैपाल में निर्धारित किये गये समय पर सम्पूर्ण जानकारी लेकर अनिवार्य रुप से उपस्थित होने के निर्देश दिये है।
मीडिया अधिकारी
जिला पंचायत जबलपुर
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